Government’s major clarification on E20 petrol : नई दिल्ली। 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा है कि भारत में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम किसी जल्दबाजी का परिणाम नहीं, बल्कि दो दशकों से अधिक समय तक चली योजनाबद्ध और चरणबद्ध प्रक्रिया का नतीजा है।

मंत्रालय ने बताया कि 23 जून 2026 को इस विषय पर पहली विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी। इसके बाद 4 जुलाई 2026 को ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर E20 पेट्रोल को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बावजूद सामने आ रही शंकाओं को देखते हुए सरकार ने ‘अक्सर पूछे जाने वाले सवाल’ (FAQ) जारी कर तथ्यों के साथ जवाब दिए हैं।
2001 से शुरू हुई थी इथेनॉल ब्लेंडिंग की यात्रा
सरकार के अनुसार भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग की शुरुआत मौजूदा सरकार के कार्यकाल में नहीं हुई। वर्ष 2001 में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसके बाद 2004 में औपचारिक घोषणा हुई और 2006 तक कई राज्यों में E5 (5 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) लागू किया गया।
जनवरी 2013 में तत्कालीन सरकार ने इस नीति की अधिसूचना जारी की, लेकिन 2014 तक देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर केवल करीब 1.5 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया था। उस समय सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त इथेनॉल उत्पादन की थी, क्योंकि देश लगभग पूरी तरह गन्ने पर आधारित उत्पादन पर निर्भर था।
2018 के बाद तेज हुआ इकोसिस्टम का विकास
मंत्रालय ने बताया कि मई 2018 में राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) लागू होने के बाद इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर बड़े स्तर पर काम शुरू किया गया।
इस दौरान पेट्रोलियम मंत्रालय, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, सड़क परिवहन मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, भारतीय रेलवे समेत कई विभागों ने मिलकर उत्पादन, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और निवेश को बढ़ावा देने के लिए समन्वित प्रयास किए।
अगस्त 2021 में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इथेनॉल की कमी वाले क्षेत्रों में डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट (DEP) स्थापित करने के लिए निवेश आमंत्रित किए।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं में दीर्घकालिक खरीद समझौते, बैंकिंग सहयोग और सुरक्षित वित्तीय व्यवस्था के कारण निजी निवेश में तेजी आई और देश की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
नीति आयोग ने तैयार किया था विस्तृत रोडमैप
मंत्रालय के अनुसार जून 2021 में नीति आयोग ने ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों, कृषि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद E20 ब्लेंडिंग का विस्तृत रोडमैप जारी किया था।
इस रोडमैप में पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने जैसे लाभों का विस्तृत उल्लेख किया गया था। उत्पादन क्षमता बढ़ने के बाद 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष्य व्यावहारिक माना गया।
सरकार का कहना है कि भारत ने ब्राजील सहित अन्य देशों के अनुभवों से सीख लेकर आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के जरिए अपेक्षाकृत कम समय में यह लक्ष्य हासिल किया।
E20 को लेकर ऑटोमोबाइल कंपनियों से हुई थी व्यापक चर्चा
सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, कंपोनेंट निर्माताओं, टेस्टिंग एजेंसियों और रिसर्च संस्थानों के साथ कई दौर की तकनीकी चर्चाएं हुईं।
इंजन की क्षमता, ईंधन प्रणाली, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी, माइलेज, उत्सर्जन, इंजन की टिकाऊ क्षमता और वाहन प्रदर्शन जैसे सभी पहलुओं का परीक्षण किया गया। सरकार का कहना है कि यदि कंपनियां पूरी तरह संतुष्ट नहीं होतीं तो वे E20 को मंजूरी नहीं देतीं और न ही वाहनों पर वारंटी जारी करतीं।
पुरानी गाड़ियों में भी नहीं मिली बड़ी तकनीकी समस्या
मंत्रालय के मुताबिक मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें करीब 1.5 करोड़ गैर-E20 प्रमाणित वाहन भी शामिल थे। कंपनी को E20 के कारण जंग, असामान्य घिसाव या इंजन पार्ट्स की आयु कम होने जैसी कोई व्यापक समस्या नहीं मिली।
इसी तरह हीरो मोटोकॉर्प ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए E20 के उपयोग को सुरक्षित बताया है।
माइलेज थोड़ा कम, लेकिन कई फायदे अधिक
सरकार ने स्वीकार किया कि कुछ वाहनों में E20 के इस्तेमाल से 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है, लेकिन इसके कई अन्य फायदे हैं।
E20 में अधिक ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन, स्मूद एक्सेलरेशन और इंजन की बेहतर कार्यक्षमता मिलती है। इसके साथ ही यह कम प्रदूषण फैलाता है और लाइफ साइकिल कार्बन उत्सर्जन में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी लाने में मददगार माना गया है।
शुद्ध पेट्रोल और E10 का विकल्प क्यों नहीं?
सरकार का कहना है कि देशभर में एक साथ शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 की अलग-अलग सप्लाई चेन चलाना व्यावहारिक नहीं है।
भारत में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप विशाल रिफाइनरी, पाइपलाइन और डिपो नेटवर्क से जुड़े हैं। यदि तीन अलग-अलग प्रकार के बेस पेट्रोल की आपूर्ति की जाए तो लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी, इन्वेंट्री प्रबंधन जटिल होगा और पूरे वितरण तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रीमियम पेट्रोल की तुलना E20 से करना उचित नहीं है, क्योंकि प्रीमियम फ्यूल सीमित मात्रा में विशेष एडिटिव्स के साथ बेचे जाते हैं, जबकि E20 पूरे राष्ट्रीय वितरण नेटवर्क का हिस्सा है।
हजारों करोड़ के निवेश और किसानों को मिलेगा लाभ
मंत्रालय के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में इथेनॉल उत्पादन, डिस्टिलरी, स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करने के लिए सरकारी बैंकों और अन्य संस्थानों ने लगभग एक लाख करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के स्तर पर निवेश को समर्थन दिया है।
सरकार का कहना है कि यदि अब फिर से E10 या शुद्ध पेट्रोल पर लौटने का निर्णय लिया जाता है तो इससे किसानों, सहकारी समितियों, उद्यमियों, बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा किए गए बड़े निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
सरकार का दावा—E20 ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए अहम कदम
पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि E20 केवल एक नया ईंधन नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्रालय का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षण, ऑटोमोबाइल उद्योग की सहमति और व्यापक तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही E20 को लागू किया गया है। इसलिए इसे जल्दबाजी का फैसला बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। सरकार का दावा है कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम दो दशक से अधिक समय की तैयारी, चरणबद्ध सुधार और व्यापक नीति निर्माण का परिणाम है।


