Iran-US Tension : नई दिल्ली, ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव लगातार बना हुआ है। हाल के दिनों में हुई सैन्य घटनाओं और तीखी बयानबाजी ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इसी बीच ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ईरान को अमेरिका पर “जीरो विश्वास” है और यदि वॉशिंगटन किसी भी समझौते से पीछे हटता है तो ईरान Full-Scale Defence यानी पूरी क्षमता के साथ अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिका पर भरोसा नहीं, युद्ध की तैयारी जरूरी: गालीबाफ
मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने इंडोनेशिया की पीपल्स कंसल्टेटिव असेंबली के स्पीकर अहमद मुजानी के साथ हुई बैठक के बाद अपने आधिकारिक टेलीग्राम संदेश में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल वही देश कर सकता है जो हर समय युद्ध के लिए तैयार हो।
उन्होंने दावा किया कि 17 जून को हुई शांति वार्ता के दौरान उन्होंने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से भी स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
गालीबाफ के मुताबिक, ईरान ने कभी भी अपनी सैन्य तैयारियों में कमी नहीं आने दी। उनका कहना था कि यदि अमेरिका भविष्य में किसी समझौते का उल्लंघन करता है तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा और अपने राष्ट्रीय हितों तथा अधिकारों की रक्षा करेगा।
ट्रंप का बयान भी बढ़ा रहा है तनाव
ईरानी स्पीकर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है, लेकिन वह युद्धविराम (सीजफायर) को अब समाप्त मानता है।
ट्रंप के अनुसार, ईरान ने बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया था, जिसे अमेरिका ने स्वीकार किया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा सीजफायर अब प्रभावी नहीं माना जा रहा है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास और अधिक गहरा होता दिखाई दे रहा है।
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दो सप्ताह भी नहीं टिक सका युद्धविराम
पिछले महीने 17 जून को दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। उम्मीद की जा रही थी कि इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी, लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।
25 जून को होर्मुज क्षेत्र में एक जहाज पर हुए हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया, जिससे युद्धविराम व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गया।
पश्चिम एशिया में बढ़ सकती है अस्थिरता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे नहीं बढ़ी तो पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर डाल सकता है।
ईरान का सख्त रुख और अमेरिका की ओर से आए ताजा बयान यह संकेत देते हैं कि फिलहाल दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।


