One Nation One Election : रायपुर, 11 जुलाई। देश में चुनावी व्यवस्था को बदलने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) इस प्रस्ताव को 2029 के लोकसभा चुनाव तक लागू करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। समिति देशभर के राजनीतिक दलों, राज्यों के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार राय ले रही है।
JPC के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के अनुसार, अब तक समिति के सामने आए सुझावों में बड़ी संख्या में लोगों और संगठनों ने एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से चुनाव प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और कम खर्चीला बनाया जा सकता है।
बार-बार चुनाव से होने वाले खर्च और प्रशासनिक प्रभाव पर चर्चा
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुख्य उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराना है। इसके समर्थकों का तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में लग जाता है और विकास कार्यों पर भी असर पड़ता है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने गोवा दौरे के दौरान कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का प्रभाव छोटे राज्यों पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि पूरे देश के लिए एक साझा चुनावी व्यवस्था बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
राज्यों की भूमिका होगी अहम
वन नेशन, वन इलेक्शन लागू करने के लिए राज्यों की सहमति और संवैधानिक बदलाव सबसे महत्वपूर्ण पहलू होंगे। क्योंकि देश में अलग-अलग समय पर विधानसभा चुनाव होते हैं, इसलिए सभी राज्यों के चुनावी चक्र को एक साथ लाने के लिए विशेष व्यवस्था करनी होगी।
JPC इस मुद्दे पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और राजनीतिक दलों से सुझाव ले रही है। समिति यह समझने की कोशिश कर रही है कि इस व्यवस्था को लागू करने में किन कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
विपक्ष की अलग-अलग राय
जहां कई दल एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ राजनीतिक दल इसके विरोध में भी हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि इससे राज्यों के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव स्थानीय मुद्दों पर आधारित होते हैं, इसलिए उन्हें लोकसभा चुनाव के साथ जोड़ना उचित नहीं होगा।
अगर ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ योजना को मंजूरी मिलती है तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारतीय चुनाव व्यवस्था में बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। हालांकि इसके लिए संसद में कानून पारित करने के साथ-साथ राज्यों और राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना भी जरूरी होगा।
फिलहाल JPC इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और केंद्र सरकार का फैसला तय करेगा कि देश की चुनावी व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी।


