UCC रायपुर, 21 जुलाई। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने UCC की संभावनाओं का अध्ययन करने और इसका प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (हाई लेवल कमेटी) का गठन किया है। यह समिति राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों, सामाजिक परंपराओं और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी, जो सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रह चुकी हैं।
समिति करेगी व्यापक अध्ययन
सरकारी सूत्रों के मुताबिक समिति को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े कानूनों का परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति यह भी देखेगी कि राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए UCC लागू करने की व्यवहारिक चुनौतियां क्या हो सकती हैं।
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समिति विभिन्न समुदायों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी सुझाव ले सकती है।
सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार का कहना है कि समिति का गठन केवल अध्ययन और सुझाव के उद्देश्य से किया गया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पक्षों की राय और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों में UCC को लेकर चर्चा तेज है।
रंजना प्रकाश देसाई का अनुभव
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश रह चुकी हैं और कई महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई का हिस्सा रही हैं। उन्हें विधि और प्रशासनिक मामलों का लंबा अनुभव है। इससे पहले भी वे विभिन्न आयोगों और समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
क्या होता है UCC?
समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ है कि सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून लागू हो। वर्तमान में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
संविधान के नीति निदेशक तत्वों के तहत अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा
समिति गठन की घोषणा के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भाजपा ने इसे महिलाओं के अधिकारों और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है, जबकि कुछ संगठनों ने कहा है कि इस विषय पर सभी समुदायों से व्यापक संवाद होना चाहिए।


