Reservation Hatao Andolan: जंतर-मंतर पर हुए चर्चित ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद सोशल मीडिया पर ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ तेजी से चर्चा में है। इंस्टाग्राम पर चल रहे इस अभियान ने महज पांच दिनों में 58 लाख (5.8 मिलियन) फॉलोअर्स होने का दावा किया है। यह अभियान खुद को किसी भी राजनीतिक दल से अलग बताते हुए आरक्षण नीति में बदलाव की मांग कर रहा है। हालांकि, इस अभियान के संस्थापक या संचालक की आधिकारिक पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
इंस्टाग्राम पर तेजी से बढ़ी लोकप्रियता
‘Reservation Hatao Movement’ नाम से चल रहे इंस्टाग्राम अकाउंट पर 100 से अधिक पोस्ट साझा की गई हैं। प्रोफाइल में इसे नागरिकों द्वारा शुरू किया गया अभियान बताया गया है, जो आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग करता है। प्रोफाइल में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे “Educate, Agitate, Organize” का भी उल्लेख किया गया है। इसके साथ हिंदी में लिखा गया है, “सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान” और अंत में “जय हिंद” का संदेश दिया गया है।
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क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?
अभियान से जुड़े पोस्टों में दावा किया गया है कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था से योग्यता आधारित प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है और जातीय विभाजन बढ़ता है। संगठन ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—
- सरकारी दस्तावेजों में जाति का उल्लेख अनिवार्य न हो।
- स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में जाति पूछने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
- सार्वजनिक जीवन में जातिगत पहचान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाओं को खत्म किया जाए।
- “एक देश, एक पहचान – भारतीय” की अवधारणा लागू की जाए।
- अभियान का प्रमुख नारा है— “आरक्षण हटाओ, जातिवाद हटाओ।”
संवेदनशील और संवैधानिक मुद्दा
आरक्षण भारत में एक संवेदनशील और संवैधानिक विषय है। संविधान के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए विभिन्न परिस्थितियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी अभियान की मांगें केवल जनमत का एक पक्ष दर्शाती हैं। किसी भी बदलाव के लिए संवैधानिक प्रक्रिया, संसद और न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन फिलहाल सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स लगातार बढ़ने का दावा किया जा रहा है और अभियान आरक्षण नीति में बदलाव की मांग कर रहा है। हालांकि, इस विषय पर देश में अलग-अलग विचार हैं और किसी भी संभावित बदलाव के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक होगा।


