Bastar Dussehra : जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जगदलपुर पहुंचीं और ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने बस्तर की आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था की सराहना की। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वह भी उसी संस्कृति से आती हैं, जहां उनके दादा और पिता मांझी हुआ करते थे। उन्होंने कहा, “मेरे दादा और पिता मांझी थे, मैं मांझी की बेटी हूं।” राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें आदिवासी परंपराओं और उनकी सामाजिक व्यवस्था की जानकारी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि समय के साथ शासन व्यवस्थाएं बदली हैं, लेकिन आदिवासी समाज की अपनी परंपराएं और सामुदायिक व्यवस्था आज भी महत्वपूर्ण हैं।
मुरिया दरबार में राष्ट्रपति ने की आदिवासी परंपराओं की सराहना
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुरिया दरबार को बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं ऐसी संस्कृति से जुड़ी हैं, जहां पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं का विशेष महत्व रहा है।
अपने परिवार की परंपरा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि उनके दादा और पिता मांझी थे। इसी वजह से वह आदिवासी समाज की परंपराओं और व्यवस्थाओं को समझती हैं। उनके संबोधन में आदिवासी पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव साफ दिखाई दिया।
राजाओं से ब्रिटिश शासन और लोकतंत्र तक का सफर
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने बस्तर के ऐतिहासिक और सामाजिक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले राजाओं का शासन था, इसके बाद ब्रिटिश शासन आया और अब देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ नियम-कानून और शासन की व्यवस्थाएं बदलती रहती हैं। इसके बावजूद आदिवासी समाज की अपनी पारंपरिक व्यवस्थाएं और रीति-रिवाज बने हुए हैं। इन परंपराओं के माध्यम से समुदाय के लोग सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करते हैं।
आदिवासी समाज की एकता और शांति का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने आदिवासी समाज की सामुदायिक भावना की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोग अपनी परंपराओं के अनुसार शांतिपूर्वक एक साथ रहते हैं। वे खुशियां और त्योहार मिलकर मनाते हैं।
उन्होंने इस सामाजिक एकता को आदिवासी संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में प्रस्तुत किया। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में पारंपरिक संस्थाओं और सामुदायिक सहभागिता की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है।
बस्तर दशहरा की अनूठी सांस्कृतिक पहचान
बस्तर दशहरा देश के प्रसिद्ध पारंपरिक आयोजनों में शामिल है। इसकी विशेषता यह है कि यहां उत्सव की परंपराएं स्थानीय देवी-देवताओं, आदिवासी रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहभागिता से गहराई से जुड़ी हैं। मुरिया दरबार भी इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां समाज और परंपराओं से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है।
राष्ट्रपति की मौजूदगी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दी।


