पुराने चेहरों की छुट्टी, बूथ स्तर तक नए चेहरों को कमान
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भाजपा केंद्रीय कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इस नए बदलाव का सबसे बड़ा असर जिला और मंडल कमेटियों पर पड़ेगा। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक, जिन पदाधिकारियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है या जो निष्क्रिय चल रहे हैं, उन्हें हटाया जाएगा। पार्टी ने तय किया है कि कम से कम 35 प्रतिशत पदों पर 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को जगह दी जाएगी। इस रणनीति के तहत प्रत्येक जिला इकाई में एक विशेष ‘प्रोफेशनल्स सेल’ का गठन होगा जो सीधे प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट करेगा।
आम जनता और जमीनी राजनीति पर क्या होगा असर?
पार्टी की इस नई कार्यप्रणाली से जमीनी स्तर पर जनसंवाद का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। अब तक पारंपरिक रैलियों और पर्चा वितरण पर निर्भर रहने वाली टोलियां अब डेटा-ड्रिवेन गवर्नेंस और सोशल मीडिया आउटरीच पर ध्यान केंद्रित करेंगी। स्थानीय मुद्दों, जैसे नगर निगम के काम, बिजली-पानी की शिकायतें और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए ये पेशेवर युवा सीधे जनता के बीच जाएंगे। आम नागरिकों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि अब स्थानीय नेताओं की जवाबदेही बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा।




