CG NEWS : रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाथियों और उनके शावकों की मौत का सिलसिला चिंता का विषय बनता जा रहा है। पिछले 25 दिनों के भीतर प्रदेश में चार हाथी शावकों की मौत दर्ज की गई है, जबकि बीते छह महीनों में मृत शावकों की संख्या बढ़कर 10 तक पहुंच गई है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्थाओं और वन विभाग की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वन विभाग की ओर से हाथियों की सुरक्षा के लिए ड्रोन निगरानी, विशेष गश्त, ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम जैसे कई उपाय किए जाने का दावा किया जाता है। हालांकि हाल के आंकड़े बताते हैं कि इन प्रयासों का अपेक्षित प्रभाव जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। लगातार हो रही मौतों से वन्यजीव विशेषज्ञ और पर्यावरण प्रेमी भी चिंता जता रहे हैं।
जानकारी के अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ के विभिन्न वन क्षेत्रों में करीब 450 हाथी विचरण कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में शावक भी शामिल हैं। हाथियों का दल अक्सर भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ जाता है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी शावकों की मौत के पीछे प्राकृतिक कारणों के अलावा बीमारी, दुर्घटना, बिजली करंट, जलस्रोतों की कमी और मानव गतिविधियों का भी प्रभाव हो सकता है। ऐसे मामलों की गहन जांच और दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाथियों की निगरानी लगातार की जा रही है और शावकों की मौत के प्रत्येक मामले की जांच कराई जा रही है। विभाग का दावा है कि हाथियों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन लगातार बढ़ते मौत के आंकड़े चुनौती बने हुए हैं।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि हाथियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना, कॉरिडोर विकसित करना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हाथियों और उनके शावकों की सुरक्षा और बड़ी चुनौती बन सकती है।



