CGPSC 2003 Recruitment Scam : बिलासपुर/नई दिल्ली | छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े प्रशासनिक घोटालों में से एक ‘CGPSC 2003 भर्ती मामले’ में एक नया और बेहद अहम मोड़ आया है। दो दशकों से इंसाफ की जंग लड़ रही मुख्य याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित विशेष लोक अदालत में समझौते की किसी भी गुंजाइश को साफ तौर पर सिरे से खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की विशेष पहल और पक्षकारों को बुलावा
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए ‘विशेष लोक अदालत’ का आयोजन किया है। इसी कड़ी में CGPSC 2003 घोटाले से संबंधित पक्षकारों को भी आपसी सुलह और समझौते के लिए आमंत्रित किया गया था। इस बुलेटिन के बाद चर्चाएं तेज थीं कि क्या 21 साल पुराने इस विवाद का अंत समझौते के साथ होगा, लेकिन मुख्य याचिकाकर्ता के रुख ने तस्वीर साफ कर दी है।
“21 साल का संघर्ष सिर्फ न्याय के लिए”: वर्षा डोंगरे
मामले की मुख्य याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे ने लोक अदालत में अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों की नौकरी का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की शुचिता का है।
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समझौते का विरोध: वर्षा ने दोटूक कहा कि योग्यता के साथ जो खिलवाड़ साल 2003 में हुआ था, उस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
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भ्रष्टाचार का मुद्दा: उन्होंने तर्क दिया कि जो भर्ती भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं की बुनियाद पर टिकी है, उसमें “मिडिल पाथ” या सुलह का रास्ता चुनना उन योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा जिनका भविष्य बर्बाद हुआ।
क्या था CGPSC 2003 भर्ती घोटाला?
साल 2003 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) द्वारा आयोजित पहली राज्य सेवा परीक्षा में बड़े पैमाने पर उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर, नंबरों को काटने और अपात्रों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे।
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हाईकोर्ट का फैसला: बिलासपुर हाईकोर्ट ने जांच में गड़बड़ी पाते हुए पूरी मेरिट लिस्ट को फिर से बनाने और चयनित अधिकारियों को हटाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
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सुप्रीम कोर्ट में मामला: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चयनित अधिकारी और राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां यह मामला सालों से विचाराधीन है।


