राखड़ उड़ती रही, गांव धूल में डूबते रहे
रायगढ़ के कई गांव लंबे समय से फ्लाईऐश प्रदूषण की मार झेल रहे थे। सड़क किनारे राख की परतें दिखना आम बात हो गई थी। तेज हवा चलती तो खेतों से लेकर घरों तक धूल फैल जाती। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही। अब जाकर पर्यावरण विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों के मुताबिक जांच टीमों ने औद्योगिक इकाइयों के फ्लाईऐश स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और डिस्पोजल सिस्टम की जांच की। कई जगह सुरक्षा मानकों का पालन नहीं मिला। कुछ कंपनियों पर खुले में राख फेंकने और परिवहन के दौरान ढंकाव नहीं करने के आरोप भी सामने आए।
छह महीने तक चला जांच अभियान
क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल ने पिछले छह महीनों में अलग-अलग चरणों में निरीक्षण किए। अधिकारियों ने रिकॉर्ड खंगाले, सैंपल लिए और स्थानीय शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाया। इसके बाद 10 कंपनियों पर आर्थिक दंड लगाया गया। औद्योगिक इलाके में शुक्रवार शाम माहौल अलग दिखा। कई फैक्ट्री गेट्स पर अचानक गतिविधियां तेज हो गईं। कर्मचारी फाइलें संभालते दिखे। कुछ जगहों पर राख ढोने वाले वाहनों को भी रोका गया। ऐसा लगा जैसे पूरे उद्योग क्षेत्र में एक साथ चेतावनी की घंटी बज गई हो।
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स्थानीय लोगों ने कहा- अब जाकर सुनवाई हुई
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से फ्लाईऐश के कारण सांस लेने में दिक्कत, खेतों की मिट्टी खराब होने और पानी प्रदूषित होने की शिकायतें बढ़ रही थीं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि रात के समय राख का अवैध निपटान किया जाता था।


