इलेक्ट्रिक कार— पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर पड़ा है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने के बाद देश के कार खरीदारों का रुख तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की तरफ हुआ है। चालू वित्त वर्ष में ईवी की मांग ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
Fuel Price Hike: भारत में तेजी से बढ़े इलेक्ट्रिक कारों के खरीदार, CRISIL ने कहा- 2028 तक 10% बाजार पर होगा EV का कब्जा

क्रिसिल की रिपोर्ट: वित्त वर्ष 2025-26 में बिकीं 2.2 लाख इलेक्ट्रिक कारें
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में रिकॉर्ड 2.2 लाख इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री दर्ज की गई। एजेंसी का अनुमान है कि अगर ईवी को अपनाने की यही रफ्तार जारी रही, तो साल 2027-28 तक भारत में इलेक्ट्रिक कारों की सालाना बिक्री 5 लाख यूनिट के पार निकल जाएगी। इस उछाल के साथ कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर सीधे 10% तक पहुंचने की उम्मीद है।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इस साल मार्च से मई के बीच भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की औसत मासिक बिक्री में 40% का भारी उछाल देखा गया है। इन तीन महीनों के दौरान हर महीने औसतन 26,000 यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री हुई। इस बढ़त के कारण ऑटोमोबाइल बाजार में ईवी की कुल हिस्सेदारी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में महज 4.6% थी, वह अब बढ़कर 6.1% के स्तर पर पहुंच गई है।
ईंधन के दाम बढ़ने से ईवी चलाना हुआ और किफायती
मई महीने में देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में 7-8% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पारंपरिक ईंधन के महंगे होने से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा है। इस मूल्य वृद्धि के कारण इलेक्ट्रिक गाड़ियों को रखने और उन्हें चलाने का खर्च (कॉस्ट ऑफ ओनरशिप) पारंपरिक गाड़ियों के मुकाबले 3% और ज्यादा किफायती हो गया है। यही वजह है कि मध्यम वर्ग अब नई कार खरीदते समय ईवी विकल्पों को प्राथमिकता दे रहा है।
विशेषज्ञों की राय
“अंतरराष्ट्रीय कारणों से पारंपरिक ईंधन की कीमतों में जो अस्थिरता आई है, उसने भारतीय उपभोक्ताओं को एक व्यावहारिक विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। रनिंग कॉस्ट में कमी और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार इस मांग को लगातार बैकअप दे रहा है।”



