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सुनवाई के दौरान बदला माहौल, कोर्ट ने जताई नाराजगी
जानकारी के मुताबिक, डिप्टी कमिश्नर एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट पहुंचे थे। जैसे ही कोर्ट की नजर उनके पहनावे पर पड़ी, जस्टिस ने कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने पूछा कि क्या यही उनका आधिकारिक ड्रेसकोड है। टिप्पणी का लहजा इतना सख्त था कि कोर्ट रूम में मौजूद कई लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोर्ट ने यह भी पूछा कि अधिकारी प्रमोटिव कैडर से हैं या डायरेक्ट भर्ती से। सवाल सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं रहा। अदालत ने सरकारी अधिकारियों के न्यायालय के प्रति व्यवहार और गंभीरता पर भी नाराजगी जाहिर की। दोपहर के समय कोर्ट परिसर में इस घटना की चर्चा तेजी से फैल गई। गलियारों में खड़े अधिवक्ता इसी मुद्दे पर बातचीत करते दिखाई दिए। एक वरिष्ठ वकील ने कहा, “कोर्ट में पेशी सिर्फ औपचारिकता नहीं होती। वहां आचरण और प्रस्तुति दोनों मायने रखते हैं।
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सरकारी अधिकारियों के लिए बड़ा संदेश
कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह टिप्पणी सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। हाईकोर्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया है कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखना हर सरकारी अधिकारी की जिम्मेदारी है। कोर्ट परिसर के बाहर गर्म हवा चल रही थी, लेकिन अंदर माहौल उससे ज्यादा गर्म नजर आया। कुछ युवा वकील इस घटनाक्रम को प्रशासनिक अनुशासन से जोड़कर देख रहे थे। वहीं कई लोगों का कहना था कि वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट प्रोटोकॉल की जानकारी होना जरूरी है। हाल के वर्षों में कई बार अदालतें अधिकारियों की तैयारी, जवाब और व्यवहार को लेकर सख्त टिप्पणियां कर चुकी हैं। इस बार ड्रेसकोड को लेकर आई टिप्पणी ने पूरे प्रशासनिक अमले का ध्यान खींच लिया है।


