Special Intensive Revision (SIR) of Electoral Rolls : नई दिल्ली। देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को एक वर्ष पूरा हो गया है। पिछले साल 24 जून को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत अब तक देशभर में करीब 6 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। वर्तमान में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान जारी है।

बिहार में एसआईआर के दौरान लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जिसके बाद चुनाव आयोग पर पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने के आरोप लगे थे। हालांकि, इस वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया था।
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पिछले वर्ष 27 अक्टूबर को शुरू हुए एसआईआर के दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप सहित 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया गया। इस चरण में कुल मतदाता संख्या 50.99 करोड़ से घटकर 45.81 करोड़ रह गई, यानी करीब 5.18 करोड़ नाम हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का लगभग 10.2 प्रतिशत है।
एसआईआर का तीसरा चरण 14 मई से शुरू हो चुका है, जिसमें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, झारखंड, ओडिशा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश समेत दिल्ली, चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली-दमन एवं दीव शामिल हैं। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 36.73 करोड़ मतदाताओं की सूचियों का पुनरीक्षण किया जा रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार यह चरण वर्ष के अंत तक पूरा होने की संभावना है।
चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन, त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है, ताकि मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाकर केवल पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल रखा जा सके।


