Mumbai Chawl Collapse : मुंबई, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है। Mumbai Chawl Collapse की इस दर्दनाक घटना में मानखुर्द के जनता नगर इलाके में रविवार को एक तीन मंजिला चॉल अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में पांच मासूम बच्चों और एक महिला समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की टीमें मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए कई घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जताया शोक
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी संदेश में मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा गया कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने अधिकारियों को घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने और राहत कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश भी दिए हैं।
गोवंडी अस्पताल पहुंचीं मुंबई की मेयर
मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने हादसे के बाद गोवंडी अस्पताल पहुंचकर घायलों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया और अधिकारियों से राहत कार्य की विस्तृत जानकारी ली।
भारी बारिश को बताया हादसे की वजह
महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण यह इमारत ढह गई। उन्होंने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य में एनडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियां लगातार जुटी हुई हैं।
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इलाके में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना की पूरी जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अवैध निर्माण पर उठे सवाल
हादसे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने इस घटना को प्रशासनिक विफलता बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने 1 जनवरी 1995 तक बनी झोपड़ियों के पुनर्वास की घोषणा की थी और उसके बाद बनने वाली झोपड़ियों के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने की बात कही गई थी।
अबू आजमी ने सवाल उठाया कि इसके बावजूद 1995 के बाद भी बड़ी संख्या में अवैध झोपड़ियां और निर्माण कैसे होते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित रूप से भ्रष्टाचार के कारण ऐसे निर्माणों को संरक्षण मिलता रहा है।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
सपा विधायक ने मांग की कि यदि सरकार अवैध और जर्जर झोपड़ियों को हटाना चाहती है तो सबसे पहले उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने ऐसे निर्माणों को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को वह कई बार विधानसभा में उठा चुके हैं।
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उन्होंने सरकार से मांग की कि जर्जर और खतरनाक स्थिति में मौजूद झोपड़ियों को हटाकर वहां रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
लगातार बारिश से बढ़ा खतरा
मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई पुराने और जर्जर भवनों पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के दौरान कमजोर संरचनाओं के ढहने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह समय रहते खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें खाली कराए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए।
मुख्य बातें
मानखुर्द के जनता नगर में तीन मंजिला चॉल ढही।
हादसे में 5 बच्चों और 1 महिला समेत 6 लोगों की मौत।
एक घायल का अस्पताल में इलाज जारी।
एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और बीएमसी ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान किया।
अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों को लेकर जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही गई।


