CG NEWS : रायपुर। रायपुर से लगे ग्राम नकटी की सरकारी जमीन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक ओर प्रशासन सरकारी भूमि पर वर्षों से रह रहे कब्जाधारियों और अतिक्रमणकारियों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी क्षेत्र में सांसदों और विधायकों के लिए भूखंड आवंटित किए जाने की प्रस्तावित योजना चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पूरे मामले ने समानता, पारदर्शिता और सरकारी भूमि के उपयोग को लेकर कई संवैधानिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
बेदखली और भूखंड आवंटन को लेकर उठ रहे सवाल
ग्राम नकटी में प्रशासन द्वारा सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है। इस दौरान कई परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं और कुछ स्थानों पर बेदखली की कार्रवाई भी की गई है। इसी बीच यह चर्चा सामने आई कि आसपास की सरकारी जमीन का एक हिस्सा जनप्रतिनिधियों के लिए आवासीय भूखंडों के रूप में विकसित किए जाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
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यही कारण है कि विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि भूमि सार्वजनिक संपत्ति है, तो उसके उपयोग के लिए समान और पारदर्शी नीति क्यों नहीं अपनाई जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की हो रही चर्चा
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी भूमि के आवंटन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि राज्य की संपत्ति जनता की धरोहर है और उसका उपयोग सार्वजनिक हित, पारदर्शिता तथा संविधान के समानता के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। न्यायालय ने विभिन्न मामलों में यह भी कहा है कि सरकारी संसाधनों का वितरण मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता और इसके लिए निष्पक्ष एवं उचित प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है।
हालांकि, नकटी की जमीन से जुड़े मामले में किसी भी संभावित योजना या निर्णय की वैधानिकता का आकलन उसके वास्तविक तथ्यों, सरकारी नीति और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा।
सरकार के सामने पारदर्शिता की चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार इस क्षेत्र में किसी विशेष वर्ग के लिए भूखंड आवंटन की योजना आगे बढ़ाती है, तो उसे यह स्पष्ट करना होगा कि आवंटन किन नियमों और मापदंडों के आधार पर किया जा रहा है। साथ ही यह भी बताना होगा कि बेदखली और प्रस्तावित आवंटन के बीच नीति का संतुलन किस प्रकार सुनिश्चित किया गया है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जाती है तथा हर मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है।


