खुल जाएगा होर्मुज जलडमरूमध्य— पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीनों से जारी भीषण संघर्ष अब खत्म होने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने का एलान किया है। इस ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर 19 जून (शुक्रवार) को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे।

समझौते के मुख्य बिंदु: क्या बदलेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को लेकर सोशल मीडिया पर पुष्टि की है। समझौते के तहत, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का आदेश दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है।
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- सैन्य विराम: अमेरिका और ईरान के बीच सभी मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से सैन्य गतिविधियां बंद होंगी।
- आर्थिक राहत: ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील और रुकी हुई संपत्ति जारी करने पर बातचीत की नींव रखी गई है।
- 60-दिवसीय वार्ता: परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा के लिए 60 दिन की बातचीत की प्रक्रिया शुरू होगी।
आधिकारिक बयान और प्रतिक्रियाएं
ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान अमेरिकी वादों की बारीकी से निगरानी करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति समझौते का मतलब यह नहीं है कि तेहरान को अमेरिका पर पूरा भरोसा है। ईरान ने अपनी शर्तों में प्रतिबंधों को हटाने और संपत्ति जारी करने को प्राथमिकता दी है।
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आम आदमी पर क्या होगा असर?
इस समझौते से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकता है। साथ ही, क्षेत्र में शांति बहाल होने से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति बेहतर होगी।
फिलहाल, दुनिया की नजरें 19 जून की उस बैठक पर टिकी हैं, जहां इस समझौते के अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। प्रशासन के अनुसार, आने वाले दिनों में व्यापारिक मार्गों और राजनयिक संबंधों को लेकर विस्तृत गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।



