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सोने और मां लक्ष्मी का आध्यात्मिक जुड़ाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य “अक्षय” होता है, यानी उसका फल कभी खत्म नहीं होता। सोना, अपने पीले रंग के कारण, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। पीला रंग समृद्धि, ज्ञान और खुशहाली का प्रतीक है। इसलिए, अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना घर में देवी लक्ष्मी के स्थायी निवास को आमंत्रित करने जैसा माना जाता है।
विज्ञान और सोना: एक अटूट रिश्ता
सोने पर जोर देने का कारण केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है। सोना एक ऐसी धातु है, जो समय के साथ खराब नहीं होती। न इसे जंग लगता है, न यह काली पड़ती है। यह धातु स्थिर है और अपनी चमक बरकरार रखती है। इसी तरह, लक्ष्मी भी स्थिरता और चिरस्थायी समृद्धि का प्रतीक हैं। जिस घर में सोना होता है, वहां समृद्धि का संचार कभी रुकता नहीं।
क्यों अशुभ है लोहा या पीतल?
अक्षय तृतीया पर लोहा या पीतल खरीदना शुभ नहीं माना जाता है। लोहा शनि देव की धातु है, जो जीवन में संघर्ष और बाधाओं का कारण बन सकती है। पीतल, हालांकि पवित्र है, लेकिन इसकी चमक समय के साथ फीकी पड़ जाती है और इसे नियमित सफाई की आवश्यकता होती है। चूंकि अक्षय तृतीया पर हम ऐसी चीजें खरीदना चाहते हैं, जो चिरस्थायी हों, इसलिए सोना ही सबसे उपयुक्त धातु माना जाता है।
अक्षय तृतीया 2026 पर सोने की खरीदारी न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक दीर्घकालिक निवेश भी है। इस दिन सोने की भारी मांग के कारण, कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए, समझदारी से खरीदारी करना महत्वपूर्ण है। यह दिन न केवल भौतिक समृद्धि, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान की ओर भी एक कदम है।



