कोलकाता। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारतीय नौसेना को तीन नए स्वदेशी युद्धपोत सौंपते हुए कहा कि समुद्री ताकत के बिना कोई भी देश बड़ी शक्ति नहीं बन सकता। उन्होंने कोलकाता में आयोजित समारोह में स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरि, सर्वेक्षण पोत आईएनएस संशोधक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अग्रय को नौसेना में शामिल किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी समुद्री क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है और पिछले कुछ वर्षों में 40 से अधिक मेड-इन-इंडिया वॉरशिप और सबमरीन भारतीय नौसेना का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं, जो भारत की औद्योगिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण हैं।
मोदी ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार देश बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि रक्षा उत्पादन में वैश्विक स्तर पर ‘मेकर’ और ‘डिसीजन-मेकर’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धपोतों के निर्माण से स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य क्षेत्रों में हजारों कंपनियों को काम मिलता है, जिससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि INS Vikrant से शुरू हुई आत्मनिर्भर भारत की यात्रा अब नए मुकाम पर पहुंच रही है। आईएनएस अग्रय, आईएनएस दूनागिरि और आईएनएस संशोधक इस अभियान को नई गति देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 21 जून को मनाए जाने वाले विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस के अवसर पर देश के सबसे उन्नत हाइड्रोग्राफी जहाज आईएनएस संशोधक को नौसेना में शामिल किया जाना एक विशेष संयोग है।
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि समुद्री सुरक्षा, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय समृद्धि एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत आने वाले वर्षों में समुद्री क्षेत्र को रोजगार और विकास के बड़े इंजन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।



